जिन्न को कैसे बुलाया जाता है?
जिन्न को कैसे बुलाया जाता है, “जब बात आती है जिन्न को बुलाने की तो सबसे पहले दिमाग में आता है, सबसे ताकतवर मखलूक, जो कोई भी काम एक दम आसानी से कर दे। जैसे किसी का खेत चाहे कितना भी बड़ा हो, वो एक रात में जोत दे। सात समुन्दर पार नाराज प्रेमी या प्रेमिका को मना ले। और ऐसे ही काम जो आपके एक आँख झपकते ही कर दे।
आज मैं आपको जीन्न को कैसे बुलाया जाता है वो बताने जा रहा हूँ। आपने बहुत से अमल देखें होंगे और आप ने उन्हें किया भी होगा। लेकिन आपको कोई भी नतीजा नहीं मिला और न कोई सफलता मिलती है। जिन्न को बुलाने के लिए आपको बहुत सालों तक अमल करने होते हैं। उसके बाद जाकर आपको जिन्न मिलता है। जिन्न को बुलाने का अमल या तरीका नीचे बताया गया है(आप पढ़ रहे हैं : जिन्न को कैसे बुलाया जाता है?)।
जिन्न को बुलाने का तरीका? :
सबसे पहले आप एक हरे रंग का कपडा ले आएं, और फिर एक लोबान इत्र की शीशी ले आएं। अगर किसी सूरत में आपको लोबान का इत्र नहीं मिलता है तो आपको सूखा लोबान ले आना है। और उसको जलाने के लिए एक चांदी का चिराग ले आना है(आप पढ़ रहे हैं : जिन्न को कैसे बुलाया जाता है?)।
- सबसे पहले आपको नाहा कर पाक साफ़ हो लेना है।
- सभी तरह का परहेज लाजमी करना है।
- किसी जंगल या खंडहर में आपको ये अमल करना है।
- अमल आप किसी भी दिन और समय कर सकते है।
- जगह और समय फिक्स करके आप उस जगह पर उस हरे कपडे को बिछा लें।
- उसके बाद इत्र से उस कपडे और जगह को महका दो।
- फिर ये आयत पढ़ें : शनल व हूल अनुमा वा जिन्नो बिन वा बिन हुरि कैन बिस्मिल बिन।
- इस आयत को 313 मर्तबा ३०० दिन तक पढ़ना है।
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इसके अलावा अगर किसी सूरत में आपके पास लोबान इत्र नहीं है, तो जो लोबान आप लाएं हैं उसको चिराग में जला कर उस जगह में बैठने से पहले धुआं कर दे। उसके बाद आयत पढ़ें(आप पढ़ रहे हैं : जिन्न को कैसे बुलाया जाता है?)।
जिन्न को क्या पसंद होता है? :
इन कई प्रकार के होते हैं, कुछ जिन्न/जिन्नात को इत्र की खुशबु पसंद होती है तो कुछ को मिट्ठी चीजे, कुछ जिन्न को मांस पसंद होता है तो कुछ को इंसान के अंदर रहना पसंद होता है। ऐसे ही अलग अलग चीजों से मिलकर एक जिन्न आपका काम करता है। उसकी कुछ शर्तें होती हैं वो पूरी करने के बाद आपका काम जिन्न पूरा कर देता है(आप पढ़ रहे हैं : जिन्न को कैसे बुलाया जाता है?)।
जिन्न कैसे मिलता है? :
ये जिन्नात मंत्रों, कुछ ख़ास अमल, वज़ीफ़ा और दुआएं पढ़ कर मिल जाता है। अमल करने के बाद आपको कुछ नहीं करना होता बस जिन्न को ही अपना संसार बनाना होता है। जिन्न के अलावा आपका कोई भी दोस्त, भाई-बंदु नहीं होना चाहिए। सिर्फ सच्चा दोस्त आपका जिन्न होना चाहिए। अगर जिन्न को पता चल गया की आप उसे सिर्फ इस्तेमाल कर रहें हैं तो वो आपको छोड़ कर चला जायेगा(आप पढ़ रहे हैं : जिन्न को कैसे बुलाया जाता है?)।
जिन्नात कितने प्रकार के होते हैं?

जिन्नात सिर्फ २ प्रकार के होते हैं एक अच्छे और एक बुरे। अच्छे जिन्नात आपके सारे जायज काम करेंगे, जिसमे किसी को किसी प्रकार की हानि न पहुंचे, और किसी के दिल को ठेस न लगे। जैसे किसी नाराज इंसान को मानना, किसी गरीब की मदद करना, किसी की पैसो से सहायता करना इत्यादि(आप पढ़ रहे हैं : जिन्न को कैसे बुलाया जाता है?)।
और बुरे जिन्नात होते हैं वो करते हैं बुरे काम, जिसमे किसी को नुकसान पहुंचे, किसी का एक्सीडेंट करना, किसी इंसान को लकवा करना, किसी इंसान को ऐसी बीमारी देना जिसका कोई इलाज न हो, किसी की जान लेना जैसे वाले काम। जो मौलाना, मौलवी, ओझा, तांत्रिक, पंडित, पाटी कहते हैं कि जिन्नात ऐसे होते वैसे होते हैं तो ये बात एक दम झूठ है। जिन्नात सिर्फ २ प्रकार के होते हैं(आप पढ़ रहे हैं : जिन्न को कैसे बुलाया जाता है?)।
जिन्नात को बुलाने की दुआ इन हिंदी :

यहाँ हम जिन्नात को बुलाने का अमल बताने जा रहे है। जैसा की आपको पता ही है कि जिन्नात सबसे ताकतवर मखलूक होता है, और काफी लोगों की बहुत इच्छा होती है कि वो उसको पकडे उसको किसी चीज में कैद करके, उस से जो काम चाहे करवा सकते हैं तो दोस्तों आज मैं आप सभी को एक और तरीका बताने जा रहा हूँ जिस से आप जिन्नात को देख ही नहीं उसको बुला भी सकते हैं। (आप पढ़ रहे हैं : जिन्न को कैसे बुलाया जाता है?)।
तो सबसे पहले आपको कोई भी एक दिन मुक़्क़र्र कर लेना है। और फिर जिन्नात को बुलाने के लिए आपको उस दिन नाहा लेना है। फिर आपको शाम को ७ बजे ये आयत पढ़नी है। आयत ये है : या मुहसिनु या मुज़म्मिलु या मुनइमु या मुफ़स्सिलू आरिनि वजहा हबीबी व नबीय्यी मुहम्मदिन सल्लल्लाहु तआला अलयहि व आलिहि व सल्लम। उसके बाद आपको रात को १२ से ३ बजे के बिच कब्रिस्तान जाना है। वहां जा कर आपको अपने सर के बाल काट कर जला देने है। जिन्न आपके साथ साथ हो जायेगा।
जिन्न से बात करना उसको अपनी सभी परेशानिया बताने से पहले उसे बोलना की मैं आपको कौनसे नाम से बुलाउ। तब वो आपका दोस्त बन जायेगा। और कोई भी काम करवाने से पहले उसके अच्छे दोस्त बन जाना। कही ऐसा न करना कि आपकी आज ही मुलाकात हो और आज ही आप उसको कोई काम बता दो। उसके अच्छे और सच्चे दोस्त बनना। तभी आपके सभी काम करेगा जिन्नात। (आप पढ़ रहे हैं : जिन्न को कैसे बुलाया जाता है?)।
एक दिन का जिन्नात का अमल :

जिन्नात का एक दिन का अमल करने का तरीका है कि सबसे पहले आपको आक के पौधे के सामने बैठ जाना है और फिर उस पौधे को लाल रंग से नहला कर साफ़ करना है और ये दुआ पढ़नी है : ला हवला जिन्न सुर जिन्न ला कुव्वता इल्ला बिल्लाहिल अलियइल अजीम इन्नहु जिन्ना जिन्न सुर अल जिन्न आतुनी मुसलमीन।
इस दुआ को लगातार पढ़ना है जब तक आपको जिन्नात की हाज़िरी न हो। जब जिन्नात आपके सामने हाज़िर हो जाये तो उस से डरना नहीं है। जिन्नात कुछ भी बोले उसको बोलना है कि आप जो कहोगे मैं करुगा और जो मैं कहुगा वो आपको करना होगा। (आप पढ़ रहे हैं : जिन्न को कैसे बुलाया जाता है?)।
जिन्न को बुलाने का सही तरीका :
जिन्नात को बुलाने का तरीका ऐसा है कि आपको सबसे पहले सलीब की दो लकडिया लेकर उनके बीच में सुराख़ करके कि वे लकड़ियां फटे नहीं। इन सुराखों में डोरा डाल कर उसे कबरिस्तान में जाकर गाड़ दें। और ३ दिन तक पड़ा रहने दें। तीसरे दिन जाकर निकाल लें। जिन्नात आपके पीछे पीछे आ जायेगा और आपको उसको ये दुआ पढ़ कर काबू करना है “व नुन्जिज्जुल मीनल कुरानी माहुवा शिफाउ अल जिन्न फट आलमीन” जिन्नात काबू में आ जायेगा।
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